1 तस्वीर, 1 कहानी
मैंने हमेशा @suboohi द्वारा आयोजित इस प्रतियोगिता में भाग लेने की आदत बना रखी थी, और मुझे पूरा भरोसा था कि यह जारी रहेगी; लेकिन दुर्भाग्यवश यह बंद हो गई। फिर भी, मैं अभी भी इस पर लिखना चाहता हूँ।
यह कहानी आज से २२-२३ साल पुराणी हे, अनुप्रिया एक साधारण शहर की माध्यम परिवार की बेटी हे, उसने बहुत मेहनत करके अपनी खुद की बचतों और पिता के सहयोग से एयर होस्टेस का प्रशिक्षण प्राप्त किया हुआ हे, लेकिन उसकी आयु काम होने के कारण उसे अभी तक हवाई क्रिउ में कोई जॉब ऑफर नहीं हुआ हे. फिर एक दिन उसे एक बहुत नामी हवाई कंपनी ने डेस्क मॅनॅग्मेंट में नौकरी करने का ऑफर दिया , और साथ ही ये आश्वासन भी दिया की जब उसकी आयु २१ वर्ष हो जाएगी तो उसे हवाई दल में भी शामिल किया जायेगा। अनुप्रिया की ख़ुशी कोई ठिकाना न रहा।
वो अपने शहर से २०० किलोमीटर की दूरी पर स्थित देश की राजधानी के अंतर्राष्ट्रीय हवाई अडडे पर नौकरी करने के अति उत्साहित थी , इसीलिए उसने शीघ्र ही जाने की सारी तयारी की और अपने पिता के साथ नए स्थान पर रहने आ गयी।
एक सप्ताह की ट्रेनिंग के बाद उस को अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के अंतर्राष्ट्रीय टर्मिनल पर विदेश जाने वाले पैसेंजर्स के चेकआउट लगेज और बोर्डिंग पास बनाने की ड्यूटी आवंटित की आगयी।
ये काम बहुत आसान नहीं थे क्योंकि विदेश जाने वाले देशी विदेशी पैसेंजर या तो बहुत जल्दी में रहते हैं या बेहद घमंडी प्रवर्ति के लोग होते हैं , इनमे सब्र नहीं होता हे. शुरू में ऐसे यात्रियों की अकड़ और जलबाजी अनुप्रिया को उत्तेजित करती थी, लेकिन फिर वो धीरे धीरे सामान्य हो गयी , और ज्यादा बहस करने वाले या अकड करने वाले यात्रयों को अपने सीनियर्स के पास भेज देती थी।
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जब भी वो अपने काम से फ्री होकर अपने निवास के लिए जाती थी तो उसे एक महिला को आगमन क्षेत्र में किसी अपने के नाम लिखा बैनर के साथ देखती थी , जैसे वो किसी अपने के आने की प्रतिक्षा कर रही थी। लेकिन जब उसने उस महिला को कई दिनों तक वहां देखा तो उसको बहुत आश्चर्य हुआ क्योंकि ये एक आसाधारण स्थिति थी , ऐसा कभी नहीं होता की कोई रोजाना किसी की प्रतीक्षा करता हो.
अनुप्रिया ने ये भी नोटिस किया की उस महिला की आँखें निस्तेज दिखती थी और उनमे कोई जोश या ख़ुशी नहीं थी।
आखिरकार एक दिन अनुप्रिया का सब्र का बाँध टूट गया और एक दिन वो उसके पास पहुंच गयी और उससे पुछा दीदी आप रोजाना किसका इंतजार करती हो ?
उस महिला ने उसे बताया कि उसके मंगेतर वर्ड ट्रेड सेंटर अमेरिका के एक ऑफिस में नौकरी करते हैं १० सितम्बर २००१ को उन्होंने मुझे बताया था वो मुझसे मिलने आएंगे और हम शादी करेंगे , लेकिन अभी ३ साल हो गए हैं में उनका रोजाना यहाँ इन्तजार करती हूँ लेकिन वो न तो आये हैं न ही उनकी कोई खबर आयी हे.
अनुप्रिया की आँखों में आंसू आगये वो समझ गयी ये महिला जानती हे की उसका मंगेतर ११ सितम्बर को ट्विन टावर पर हुए आतंकी हमले में मारा जा चूका हे लेकिन, लेकिन वो ये मानने को तैयार नहीं हे, फिर भी उसे ३ साल बाद भी उम्मीद हे की वो वापस लौटेगा। अनुप्रिया का मन बहुत भारी हो गया।
कभी कभी में सोचता हूँ की हम इंसानो को ईश्वर ने ऐसा संवेदन क्यों बनाया हे?
मैं यहाँ @sadaf02, @suboohi और @aviral123 को भी आमंत्रित करना चाहता हूँ।
ढेर सारे प्यार और सम्मान के साथ,
सुर-रिति❤️

This is a very beautiful and touching story. You have described the emotions in a very simple and excellent manner. Especially the last part is very impressive. I know that situation. I know that sadness. This story also tells us how strong hope is, no matter how difficult the circumstances. Really great write-up, thanks for sharing.
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Thanks a lot .
सच में यह स्टोरी बहुत दुखद है , अनुप्रिया ने जो इस महिला के लिए फील किया , वह वाकई में मार्मिक संवेदना है कि कैसे वह एक महिला रोज अपने मंगेतर का इंतजार कर रही है एयरपोर्ट पर । उसकी आंखें इंतजार करते-करते पत्थर हो गई है । किसी को इस स्थिति में देखना और महसूस करना ही वाकई में बहुत कष्टदायक है। उस महिला के दिल पर क्या बीत रही होगी। भगवान सब पर कृपा बनाए रखें, किसी के साथ ऐसा ना करे। आपने इस संवेदना को बहुत ही अच्छे से दर्शाया है, बहुत सुंदर वर्णन किया है।