अज्ज हम सेर तफ़रे के लाए निकले ता मरघुज़ार जगा
हाय दोस्त ओमेद हा के सब के सब दोस्त टेक होंगे।अज्ज हम सर तफ़र के लाए निकले ता मा या हमरा परिवार' हम जेस जगा गाए ते बोहत हे खुबसूरत पुर सकुन माहुल ता।शायद मा ने असाए पुर सकुन जगा नाहे दकाए।मा जब सुबह उता तू बोहत ज्यादा खुश ता अपने परिवार के साथ सर तफ़र के लाए.हम ने सेर के लाए जगा आचे चुना ते.बोहत हे ज़बरदस्त जगा ते.हरयाले नदी या बोहत पुर सकुन माहुल ता.हम ने वहा जा के बरबे कुए बना दए.दरिया मा गाए.मा सारा दिन बोहत ख़ुश ता अपने परिवार के साथ.बोहत अच्छा वक़्त गुज़रा.पर रात को हम वापस आगर.


