वो सर्दीयों की सुबह में

in #busy7 years ago

वो सर्दीयों की सुबह में
धुंद में लिपट कर हम जाएं
इन कच्चे पक्के राहों से
इस मंज़र तक जो पहुंच पाउं
कि पत्तों पर जो बर्फ़ जमी
रात की सर्द हवाऐं से
अब धूप की कोसी किरनों से
वो क़तरा-क़तरा पिघली है
पौदों पर धीमी सी रंगत
अब लम्हा लम्हा निखरी है
कि इतने में इक सीटी सी
जो कानों में आ पहुंची हो
कि लम्हा भर हम साकित से
इस तिलसम में फिर खो जाएं
इस आस पे वहां हम बैठे हूँ
कि अब उतरे तो तब उतरे
मगर जो इक बार जाता है
वो वापिस फिर कब आता है
मगर ये मंज़र अपना सा
मेरी आँखों को यूं भाता है
कि में इस सह्र में खोकर
फिर ख़ुद को भूल जाता हूँ
इस रस्ते पै चल कर
मैं वापिस आ ना पाता हूँ
फिर वापिस आना पाता हूँ

Coin Marketplace

STEEM 0.06
TRX 0.29
JST 0.053
BTC 70376.82
ETH 2064.54
USDT 1.00
SBD 0.51