You are viewing a single comment's thread from:
RE: Pain and anger
बिल्कुल मैं आपकी बात से पूरी तरह से सहमत हूं कि हमारे बनिया समाज में बहुत ज्यादा देखा जाता है इस तरह का व्यवहार । दिल को चोट पहुंचाने में , भावनाओ को आहत करने में यह जरा भी नहीं सोचते। इसलिए मेरा यही मानना है कि किसी को भी इतना महत्व नहीं देना चाहिए कि वह अपना अधिकार समझने लगे। आपका इन कीमती
शब्दों के लिए धन्यवाद 🙏