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RE: सुख : स्वरूप और चिन्तन (भाग # १) | Happiness : Nature and Thought (Part # 1)

in #life8 years ago

@mehtaबहुत अच्छी बातें लिखी हैं आपने इस पोस्ट में .

पैसे से कभी सुख ख़रीदा नहीं जाता और दुःख का कोई खरीदार नहीं होता।

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परन्तु ऐसा कहा जाता है कि दुःख बांटने से कम हो जाता है.

जी हाँ आपने सही कहा , कोई ऐसा व्यक्ति नहीं होगा जो कहेगा की आप अपने दुःख मुझे दे दो लेकिन हम अपने दुःख अपनों के साथ साझा कर सकते हैं।

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