You are viewing a single comment's thread from:
RE: जिनवाणी : जीवन और आचरण -- भाग # ४
jai jinendra saa
यही हम स्वयं सदाचारी बने रहेंगे तो हममें इतनी शक्ति भी बनी रहेगी कि हम स्वकल्याण के साथ-साथ परकल्याण भी कर सकें – भूले हुओं को मार्गे दिखा सकें ।
बहुत उच्च सोच जो सम्पूर्ण प्राणी मात्र का कल्याण कर सकती हैं। बहुत साधुवाद।