पृथ्वी की गोलाई समेटे नथनी झूलती है भविष्य-सा कई जंगल हैं सीने में मगर ढूँढ़़ती............

in #poem4 years ago



पृथ्वी की गोलाई समेटे नथनी झूलती है भविष्य-सा कई जंगल हैं सीने में मगर ढूँढ़़ती है गीत M पूरी शिवालिक शुंखला का नाम है औरत औरत पहाड़ का नाम है

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