अदन की वाटिका में शैतानी वर्जित फल गेहूं या सेब

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शैतानका आवागमन: तफ़सीर अजीजी इत्यादिसे प्रगट है कि, जिस समय खुदाने आदमको अदनकी वाटिकामें रखा था उस समय जिबराईंलको ऐसी आज्ञा दी थी कि, आदमका पेट फाड़ डाले आधा रक्त तथा शैतानी हृदय पृथक करे। जिबराईंलने ऐसाही किया। आधा शैतानी रक्त और आधा हृदय आदमके पेटसे पृथक किया, आधा उसके भीतर रहने दिया। जब वह आधा रक्त तथा कलेजा आदमके पेटसे निकालकर अदनकी वाटिकाके एक कोनेमें गाड़ दिया। उसी शैतानी रक्त तथा हृदयसे गेहूँका वृक्ष उत्पन्न हुआ। उसीके फल खानेके लिये खुदाने वर्जा था। वह आधा शैतानी रक्त तथा हृदय आदमके भीतर रह गया था। जिससे शैतानी धूर्त और अत्याचारिणी सृष्टि उत्पन्न हुई। वह दूसरा आधा जो स्वच्छ हुआ था उससे अच्छे लोग उत्पन्न हुये। इससे प्रमाणित हुआ कि पहले शैतान आदमके भीतर था, इसके उपरान्त रक्त तथा हृदयके साथ गेहूँमें प्रवेश कर गया। जब आदमने उस गेहूँके दानेको खाया—तब शैतानने आदमकी बुद्धि विलुप्त कर दी, विजयी हुआ आज्ञोलंघनके पहले शैतान बाहरी स्वरूप धरकर धोका देता था फिर भीतर तथा बाहर ये आदम तथा आदमजादको धोका देने लगा वे सब शैतानके वशीभूत हुये।