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RE: Expectations
सबसे पहले तो धन्यवाद मेरी पोस्ट को पढ़ने और उसकी सराहना करने के लिए।
बिल्कुल सही कहा आपने,पहले ही बार ना कहने से आप कई प्रकार के धर्मसंकट से बच सकते हैं। क्योंकि कभी कभी हम मदद तो करना चाहते हैं लेकिन जितनी मदद की जरूरत सामने वाले को है उतना करना हमारी सामर्थ्य से बाहर है। तो होता यह है कि आपकी पिछली सभी मदद को व्यक्ति भूल जाता है और सिर्फ इस बार की ना याद रह जाती है। आजकल यही समय चल रहा है। यही विडम्बना है।