आज कई दिन के बाद steemit पर आने का मौका मिला , आपकी पोस्ट पढ़ी , विलम्ब के लिए खेद हे, इसमें मुझे पहले से कोई शक नहीं हे की आप एक साहसी लेखक हे, और आप हर बार कोई नया विषय लेकर आती हैं , इस बार का विषय भी एक आम लेकिन बेहद सच्चा विषय हे , हम इन समस्याओं से जूझते हैं और फिर किसी से बहुत उम्मीदें रखते हैं। लेकिन हमें ये भी सोचना चाहिए की शायद उस इंसान की उतनी हैसियत, या स्थिति न हो की वो आपकी मदद कर इसको अपना हक़ नहीं समझना चाहिए। लेकिन किसी ने सच कहा हे की यदि आप किसी को न कहते हैं या उसकी मदद में संकोच करते हैं तो आपकी इज्जत उसी समय से कम होने लगती हे. लेकिन मेरा ये मानना हे की हमेशा स्पष्टवादिता अच्छी होती हे. बाद में बुरा बनने से पहले ही बुरा बनना बेहतर हे।
लेकिन यदि आप किसी की मदद कर सकते हैं तो अवश्य करें।
शुभकामनायें।
सबसे पहले तो धन्यवाद मेरी पोस्ट को पढ़ने और उसकी सराहना करने के लिए।
बिल्कुल सही कहा आपने,पहले ही बार ना कहने से आप कई प्रकार के धर्मसंकट से बच सकते हैं। क्योंकि कभी कभी हम मदद तो करना चाहते हैं लेकिन जितनी मदद की जरूरत सामने वाले को है उतना करना हमारी सामर्थ्य से बाहर है। तो होता यह है कि आपकी पिछली सभी मदद को व्यक्ति भूल जाता है और सिर्फ इस बार की ना याद रह जाती है। आजकल यही समय चल रहा है। यही विडम्बना है।